Thursday, April 11, 2019

राहुल गांधी के 'रहस्यमय तीसरे हाथ' का सच

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की एक बुजुर्ग महिला से गले मिलने की फ़ोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है.

इस वायरल तस्वीर पर लोग सवाल पूछ रहे हैं कि तस्वीर में तीसरा 'रहस्यमय हाथ' किसका है.

भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्वीट किया, "ये तीसरा हाथ किसका है? मैंने आपसे कल ही एक अच्छी पीआर एजेंसी के साथ करार करने के लिए कहा था."

वायरल हो रही इस तस्वीर का इस्तेमाल दरअसल कांग्रेस पार्टी की न्यूनतम आय गारंटी योजना (NYAY) के प्रचार विज्ञापन में किया गया है.

एबीपी न्यूज़ के पत्रकार विकास भदौरिया ने भी ट्वीट किया, "क्या आप पहली तस्वीर में राहुल गांधी के तीन हाथों को खोज सकते हैं. अगर नहीं तो कृपया दूसरी तस्वीर देखें. यह तीसरा हाथ किसका है?"

भारतीय जनता पार्टी की सीनियर नेता और केंद्र सरकार में मंत्री स्मृति ईरानी ने इसका जवाब दिया कि कांग्रेस का ये 'छल-कपट वाला हाथ' पार्टी की भ्रष्ट मानसिकता को दिखाता है.

फ़ोटो की सच्चाई
रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि ये तस्वीर साल 2015 की है.

कांग्रेस ने दिसंबर 2015 में अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर राहुल गांधी के तमिलनाडु और पुदुचेरी के बाढ़ प्रभावित इलाक़ों के दौरे के बाद कई तस्वीरें जारी की थीं.

कांग्रेस पार्टी के ट्वीट में शामिल ओरिजनल फ़ोटो को देखकर पता चलता है कि यह फ़ोटो एक बड़ी तस्वीर का हिस्सा है. इस तस्वीर में कई अन्य लोगों को पीछे देखा जा सकता है.

विज्ञापन में इस्तेमाल के लिए तस्वीर में दिख रहे अन्य लोगों को और पृष्ठभूमि को धुंधला कर दिया गया था.

लेकिन न्याय योजना के विज्ञापन के लिए इस तस्वीर को प्रकाशित करने से पहले इसे अच्छे ढंग से एडिट नहीं किया गया.

इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने दो हिंदू लड़कियों रीना और रवीना को उनके पतियों के साथ जाने की इजाज़त दे दी है. कोर्ट ने कहा है कि इन लड़कियों की उम्र 18 साल से ऊपर है, साथ ही उनके जबरन धर्मांतरण को लेकर कोई पुख़्ता सबूत नहीं हैं.

पिछली सुनवाई के बाद कोर्ट ने एक इस मामले की जांच के लिए पूछताछ आयोग का गठन किया था.

रीना और रवीना के पिता हरी लाल ने आरोप लगाया था कि उनकी बोटियों को बंदूक़ के ज़ोर पर अग़वा कर लिया गया था.

लड़की के पिता का कहना है कि उनकी दोनों बेटियां नाबालिग़ हैं जिनकी उम्र 13 और 15 साल है.

जबरन धर्मांतरण की बात को ख़ारिज करते हुए जज ने कहा कि आयोग सिंध के देरखी इलाके में ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं. जहां लड़कियां अपना घर छोड़कर मुस्लिम लड़के से शादी करती हैं. हम ऐसी लड़कियों को संस्थागत सुविधा भी देते हैं. हालांकि ये संस्थागत सुविधाएं सरकारी एजेंसियों की ओर से नहीं दी जाती हैं.

No comments:

Post a Comment