फेसबुक ने WhatsApp का एक बड़ा फीचर मैसेंजर में देने की तैयारी कर ली है. रिपोर्ट के मुताबिक मैसेंजर के किसी भी कॉन्वर्सेशन में कोट एंड रिप्लाई का फीचर दिया जाएगा. WhatsApp में ये फीचर पहले से है. इस फीचर का मतलब ये है कि किसी एक मैसेज का रिप्लाई उस मैसेज के नीचे ही कर सकते हैं उसे कोट करके.
वेंचर बीट की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस फीचर का यूज किसी इंडिविजुअल मैसेंजर के मैसेज को होल्ड करके किया जा सकेगा जैसा आप वॉट्सऐप पर करते हैं. होल्ड करते ही यहां आपको रिप्लाई का ऑप्शन दिखेगा, यहां से आप ऑरिजनल मैसेज के रिस्पॉन्स में रिप्लाई कर सकते हैं और ऑरिजनल मैसेज कोट में दिखेगा. हालांकि कोट मैसेज के रिस्पॉन्स में कोई थ्रेड नहीं बनेगा.
फेसबुक मैसेंजर में वॉट्सऐप के कई फीचर आए हैं इसी तरह मैसेंजर के फीचर्स भी वॉट्सऐप में दिए गए हैं, क्योंकि पेरेंट कंपनी फेसबुक है. यह फीचर इस बात की तरफ इशारा करता है कि कंपनी जल्द ही क्रॉस प्लेटफॉर्म मैसेजिंग का ऑप्शन दिया जाएगा.
हाल ही में फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने कहा है कि मैसेंजर, इंस्टा और वॉट्सऐप को मर्ज करने का प्लान है. मर्ज यानी तीनों को मिला कर क्रॉस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा, ताकि मैसेंजर से वॉट्सऐप में और वॉट्सऐप से इंस्टा में मैसेज कर पाएं. ऐसे ही तीनों ऐप्स से किसी भी ऐप्स में मैसेज कर पाएंगे.
मैसेंजर के इस नए फीचर का स्क्रीनशॉट वेंचरबीट ने जारी किया है. हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि ये फीचर सभी लोगों को कब से दिया जाएगा. अभी हाल ही में मैसेंजर में डार्क मोड का फीचर दिया गया है. इसे एनेबल करने के लिए किसी चैट में मून की इमोजी भेजनी होती है फिर यूजर डार्क मोड ऑन और ऑफ करना का ऑप्शन दिया जाता है.
बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान ने चुनाव लड़ने की खबरों पर विराम लगा दिया है. अभिनेता सलमान खान ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, ना चुनाव लड़ूंगा और ना किसी पार्टी का प्रचार करूंगा. सलमान खान ने एक तरह से सियासत से तौबा करते हुए कहा कि चुनाव लड़ने की अटकलों में कोई दम नहीं है.
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोटरों को प्रेरित करने के लिए हाल ही में सलमान खान और आमिर खान को टैग करते हुए ट्वीट किया था, जिसमें लिखा था कि वोटिंग सिर्फ अधिकार नहीं है बल्कि कर्तव्य भी है. ये वक्त देश के युवाओं को अपने अंदाज में वोट करने के लिए प्रेरित करने का है, जिससे हम अपने लोकतंत्र और देश को मजबूत कर सकें. सलमान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ट्वीट का होली के दिन जवाब देते हुए लिखा कि 'हम लोकतंत्र में रहते हैं, वोट डालना हर भारतीय का कर्तव्य है. मैं हर वोटर से कहूंगा कि अपने अधिकार का इस्तेमाल करें.
बता दें कि मध्य प्रदेश कांग्रेस बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर में अपने प्रत्याशी के लिए लोकसभा चुनाव प्रचार में उतारने की कोशिश में था. जिससे बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर 30 साल बाद जीत दर्ज की जा सके.
सलमान का जन्म इंदौर के पलासिया इलाके में हुआ था और मुंबई में शिफ्ट होने से पहले उन्होंने इंदौर शहर में अपने बचपन का काफी समय गुजारा है. मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा था कि हमारे नेता सलमान खान से इंदौर में पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करने की पहले ही बातचीत कर चुके हैं. हालांकि सलमान खान ने अब राजनीति में उतरने की खबरों और कयासों का खंडन कर दिया है.
Thursday, March 21, 2019
Thursday, March 7, 2019
क्या पाकिस्तान के चरमपंथी समूह आईएएसआई के हथियार हैं?
अमरीका ने बीते साल की शुरुआत में पाकिस्तान पर चरमपंथ से मुक़ाबले में दोहरा खेल खेलने का आरोप लगाया और उसे दी जा रही मदद रोकने का ऐलान किया.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने जो आरोप लगाया, वो नया नहीं था और अब भारत एक बार फिर ऐसे ही आरोप लगा रहा है.
भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में बीती 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफ़िले पर हुए हमले में 40 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई. तब से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव है.
इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली. भारत ने इसे लेकर पाकिस्तान को डॉजियर सौंपा है.
पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अज़हर के भाई समेत 44 लोगों को गिरफ़्तार करने और संपत्तियां जब्त करने की जानकारी दी है.
हालांकि, भारत में रक्षा मामलों के विशेषज्ञ पाकिस्तान की कार्रवाई को महज दिखावा बता रहे हैं.
चरमपंथरोधी अभियानों पर नज़र रखने वाले रक्षा विशेषज्ञ डॉक्टर अजय साहनी कहते हैं, " जब इन पर (पाकिस्तान पर) बहुत दबाव पड़ता है तब उस दबाव को हटाने के लिए इन्हें जो कम से कम करना होता है वो ये करते हैं. अब इन्होंने कहा है कि दो हफ़्ते तक अगर हमें सबूत नहीं मिलेंगे तो हम इनको रिहा कर देंगे."
पाकिस्तान ने जमात उद दावा को प्रतिबंधित सूची में डालने की जानकारी भी दी है. इस संगठन के प्रमुख हाफ़िज सईद हैं जिन्हें भारत साल 2008 के मुंबई हमले के लिए कठघरे में खड़ा करता है.
सईद मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार बताए जाने वाले संगठन लश्कर ए तैयबा के भी संस्थापक हैं.
साल 2001 से प्रतिबंधित संगठनों की सूची जारी करने वाली पाकिस्तान की नेशनल काउंटर टेरिरिज़्म अथॉरिटी (एनसीटीए) की लिस्ट में साल 2002 से ही जैश और लश्कर के नाम हैं. लेकिन पाबंदी के बाद भी इन समूहों के लगातार सक्रिय होने का दावा किया जाता है.
इनके लीडर मसूद अज़हर और हाफ़िज सईद पाकिस्तान में तकरीरें करते और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते नज़र आते रहे हैं.
डॉक्टर अजय साहनी कहते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि 'पाकिस्तान के तंत्र ने ही इन समूहों को हथियार की तरह तैयार किया है'.
वो कहते हैं, "इस पूरे क्षेत्र में चाहे भारत में कार्रवाई करने वाले समूह हों या फिर अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय समूह, ये सब पाकिस्तान की इंटरसर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) के हथियार हैं."
ऐसे दावों की तस्दीक कई बार पाकिस्तान की तरफ से ही होती रही है.
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने एक टीवी इंटरव्यू में माना था कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान जिन समूहों पर दहशतगर्दी का इल्ज़ाम लगाते हैं, उन्हें कभी पाकिस्तान ने ही ट्रेनिंग दी थी.
मुशर्रफ ने इस इंटरव्यू में कहा था, " हम पूरी दुनिया से मुजाहिदीन लाए. हमने तालिबान को ट्रेंड किया. उन्हें हथियार दिए. उन्हें अंदर भेजा. वो हमारे हीरो थे. अब 1990 को लें और कश्मीर और हाफिज़ सईद वगैरह की बात करें. पाकिस्तान में उनको हीरो जैसी रिशेप्सन दी गई. उनकी ट्रेनिंग भी होती थी. हम उनके सपोर्ट में थे कि ये मुजाहिदीन हैं जो इंडियन आर्मी से लड़ेंगे अपने हकूक के लिए. यहां फिर लश्कर ए तैयबा वगैरह बनीं. 10-12 और भी बनीं."
पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार और रक्षा मामलों की जानकार मरियाना बाबर कहतीं हैं कि जो समूह पाकिस्तान की विदेश नीति को बढ़ाने में सहायक थे, उन्हें एक दौर में भरपूर मदद मिली.
वो कहती हैं, " शुरू में हमारी विदेश नीति के तहत इन समूहों को समर्थन दिया गया था. हथियार भी दिए गए थे. ट्रेनिंग भी दी गई थी. मगर सरकारी एजेंसियों के दिल में था कि ये तो कहीं और ( भारत प्रशासित कश्मीर में) कुछ कर रहे हैं. अफ़गान तालिबान हमारे उत्तरी हिस्से में थे. हक्कानी नेटवर्क पाकिस्तान में था. सोवियत यूनियन को मारते-मारते वो ट्रेंड हो गए थे."
दहशतगर्द समूहों की बढ़ती संख्या की वजह से दुनिया के कई देश आरोप लगाने लगे कि पाकिस्तान 'चरमपंथियों की ऐशगाह' बन गया है. पाकिस्तान ऐसे आरोपों से इनकार करता है लेकिन कई देश दावा करते हैं कि एनसीटीए की प्रतिबंधित सूची में शामिल 68 संगठनों में से कई नाम बदलकर सक्रिय हैं.
डॉक्टर अजय साहनी पाकिस्तान के चरमपंथी समूहों की जानकारी देते हैं.
"सभी समूहों का अलग-अलग प्रोफाइल है. बलोच समूह हैं, वो विद्रोही समूह हैं. बलूचिस्तान से इन्होंने जिस तरह का बर्ताव किया है उसे लेकर लोगों में बहुत नाराज़गी है. शियाओं के ख़िलाफ समूहों को भी सरकार ने ही तैयार किया. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे समूह इनके साये से निकलकर इनका ही विरोध करने लग गए. चौथे समूह, वो हैं जो इनके वफ़ादार हैं. ये भारत के ख़िलाफ और अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय हैं."
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने जो आरोप लगाया, वो नया नहीं था और अब भारत एक बार फिर ऐसे ही आरोप लगा रहा है.
भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में बीती 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफ़िले पर हुए हमले में 40 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई. तब से भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव है.
इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली. भारत ने इसे लेकर पाकिस्तान को डॉजियर सौंपा है.
पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अज़हर के भाई समेत 44 लोगों को गिरफ़्तार करने और संपत्तियां जब्त करने की जानकारी दी है.
हालांकि, भारत में रक्षा मामलों के विशेषज्ञ पाकिस्तान की कार्रवाई को महज दिखावा बता रहे हैं.
चरमपंथरोधी अभियानों पर नज़र रखने वाले रक्षा विशेषज्ञ डॉक्टर अजय साहनी कहते हैं, " जब इन पर (पाकिस्तान पर) बहुत दबाव पड़ता है तब उस दबाव को हटाने के लिए इन्हें जो कम से कम करना होता है वो ये करते हैं. अब इन्होंने कहा है कि दो हफ़्ते तक अगर हमें सबूत नहीं मिलेंगे तो हम इनको रिहा कर देंगे."
पाकिस्तान ने जमात उद दावा को प्रतिबंधित सूची में डालने की जानकारी भी दी है. इस संगठन के प्रमुख हाफ़िज सईद हैं जिन्हें भारत साल 2008 के मुंबई हमले के लिए कठघरे में खड़ा करता है.
सईद मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार बताए जाने वाले संगठन लश्कर ए तैयबा के भी संस्थापक हैं.
साल 2001 से प्रतिबंधित संगठनों की सूची जारी करने वाली पाकिस्तान की नेशनल काउंटर टेरिरिज़्म अथॉरिटी (एनसीटीए) की लिस्ट में साल 2002 से ही जैश और लश्कर के नाम हैं. लेकिन पाबंदी के बाद भी इन समूहों के लगातार सक्रिय होने का दावा किया जाता है.
इनके लीडर मसूद अज़हर और हाफ़िज सईद पाकिस्तान में तकरीरें करते और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते नज़र आते रहे हैं.
डॉक्टर अजय साहनी कहते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि 'पाकिस्तान के तंत्र ने ही इन समूहों को हथियार की तरह तैयार किया है'.
वो कहते हैं, "इस पूरे क्षेत्र में चाहे भारत में कार्रवाई करने वाले समूह हों या फिर अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय समूह, ये सब पाकिस्तान की इंटरसर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) के हथियार हैं."
ऐसे दावों की तस्दीक कई बार पाकिस्तान की तरफ से ही होती रही है.
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने एक टीवी इंटरव्यू में माना था कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान जिन समूहों पर दहशतगर्दी का इल्ज़ाम लगाते हैं, उन्हें कभी पाकिस्तान ने ही ट्रेनिंग दी थी.
मुशर्रफ ने इस इंटरव्यू में कहा था, " हम पूरी दुनिया से मुजाहिदीन लाए. हमने तालिबान को ट्रेंड किया. उन्हें हथियार दिए. उन्हें अंदर भेजा. वो हमारे हीरो थे. अब 1990 को लें और कश्मीर और हाफिज़ सईद वगैरह की बात करें. पाकिस्तान में उनको हीरो जैसी रिशेप्सन दी गई. उनकी ट्रेनिंग भी होती थी. हम उनके सपोर्ट में थे कि ये मुजाहिदीन हैं जो इंडियन आर्मी से लड़ेंगे अपने हकूक के लिए. यहां फिर लश्कर ए तैयबा वगैरह बनीं. 10-12 और भी बनीं."
पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार और रक्षा मामलों की जानकार मरियाना बाबर कहतीं हैं कि जो समूह पाकिस्तान की विदेश नीति को बढ़ाने में सहायक थे, उन्हें एक दौर में भरपूर मदद मिली.
वो कहती हैं, " शुरू में हमारी विदेश नीति के तहत इन समूहों को समर्थन दिया गया था. हथियार भी दिए गए थे. ट्रेनिंग भी दी गई थी. मगर सरकारी एजेंसियों के दिल में था कि ये तो कहीं और ( भारत प्रशासित कश्मीर में) कुछ कर रहे हैं. अफ़गान तालिबान हमारे उत्तरी हिस्से में थे. हक्कानी नेटवर्क पाकिस्तान में था. सोवियत यूनियन को मारते-मारते वो ट्रेंड हो गए थे."
दहशतगर्द समूहों की बढ़ती संख्या की वजह से दुनिया के कई देश आरोप लगाने लगे कि पाकिस्तान 'चरमपंथियों की ऐशगाह' बन गया है. पाकिस्तान ऐसे आरोपों से इनकार करता है लेकिन कई देश दावा करते हैं कि एनसीटीए की प्रतिबंधित सूची में शामिल 68 संगठनों में से कई नाम बदलकर सक्रिय हैं.
डॉक्टर अजय साहनी पाकिस्तान के चरमपंथी समूहों की जानकारी देते हैं.
"सभी समूहों का अलग-अलग प्रोफाइल है. बलोच समूह हैं, वो विद्रोही समूह हैं. बलूचिस्तान से इन्होंने जिस तरह का बर्ताव किया है उसे लेकर लोगों में बहुत नाराज़गी है. शियाओं के ख़िलाफ समूहों को भी सरकार ने ही तैयार किया. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे समूह इनके साये से निकलकर इनका ही विरोध करने लग गए. चौथे समूह, वो हैं जो इनके वफ़ादार हैं. ये भारत के ख़िलाफ और अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय हैं."
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