Friday, December 7, 2018

वो बीमारी जिससे ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ बिखरा भारतीय टॉप ऑर्डर

ऑस्ट्रेलियाई धरती पर जब भारतीय टीम पहुंची तो इस बार न मीडिया में और न ही किसी पूर्व खिलाड़ी का कटाक्ष आया तो लगा कि इस बार के सिरीज़ में कुछ अलग ही होना है.

कई पूर्व भारतीय क्रिकेटर्स ने भी कहा कि कंगारुओं को हराने का यह भारतीय टीम के पास सबसे अच्छा मौक़ा है, स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर जो टीम में नहीं हैं.

फिर एडिलेड में जब कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीता तो लगा कि चलो आग़ाज़ तो अच्छा है.

लेकिन जैसे ही टीम बल्लेबाज़ी के लिए उतरी तो एक बार फिर वही पुरानी कहानी दोहरा दी गई.

एक छोर पर चेतेश्वर पुजारा जमे रहे लेकिन दूसरे छोर से एक-एक कर विकेट गिरते गए.

द गॉड ऑफ़ स्टंप्स
एक बार फिर तेज़ गेंदबाज़ी के आगे भारतीय शीर्ष क्रम का नतमस्तक होना क्रिकेट प्रशंसकों को निराश कर गया. साथ ही यह चर्चा भी शुरू हो गई कि आख़िर ऑस्ट्रेलियाई धरती पर भारतीय टीम के लड़खड़ाने की वजह क्या है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भारतीय टीम की लापरवाह बल्लेबाज़ी का नतीजा है जिसकी वजह से एडिलेड में शीर्ष क्रम बिखर गया. साथ ही उनका यह भी मानना है कि बल्लेबाज़ों का शॉट सेलेक्शन ख़राब था और इसके साथ ही एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है भारतीय बल्लेबाज़ों की ऑफ़ स्टंप्स से बाहर जाती गेंदों को छेड़ने की आदत की.

ये वो आदत है जिससे भारतीय पिचों पर तो ड्राइव कर बल्लेबाज़ रन बनाने में कामयाब रहते हैं, लेकिन तेज़ पिचों पर ऐसा करना आत्महत्या कहा जा सकता है.

आख़िर क्यों भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए ऑफ़ स्टंप्स से बाहर जाती गेंद को छोड़ना इतना मुश्किल हो जाता है.

मज़ेदार तो यह है कि भारतीय खिलाड़ी रन बनाने की कोशिश में आउट नहीं हुए. बल्कि बाहर जाती गेंद पर एक ग़लत शॉट खेलने के क्रम में उनके बल्ले के बाहरी किनारे से गेंद छूती है और वो कैच आउट हो जाते हैं.

यह सिलसिला दक्षिण अफ़्रीका की तेज़ पिचों पर भी था और एडिलेड में भी यही हुआ. पिच रिव्यू के मुताबिक़ एडिलेड की पिच पर घास नहीं है, मतलब यह कि यह बल्लेबाज़ी के लिए बहुत मुश्किल पिच नहीं है.

लेकिन लगता है कि भारतीय बल्लेबाज़ों के लिए ऑफ़ स्टंप्स की गेंद को छोड़ने का नेट्स पर अभी और अभ्यास करने की ज़रूरत है.

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